Bhajana Gīti
Kirtan

दुर्जन संग कबहुँ

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
Sadhu SangaBhakti
Study with Shastra AIPDF
दुर्जन संग कबहूँ नहिं कीजै।दुर्जन - मिलन सदा दुखदाई, तिनसों पृथक रहीजै॥ 1॥दुर्जन की मीठी बानी सुनि, तनिक प्रतीति न कीजै।छाड़िय विष सम ताहि निरन्तर, मनहिं थान जनि दीजै॥ 2॥दुर्जन संग कुमति अति उपजै, हरि मारग मति छीजै।छूटै प्रेम - भजन श्रीहरि को, मन विषयन में भीजै॥ 3॥जिनसे सकल शान्ति सुख मन के, सिर धुनि-धुनिकर मीजै।मन अस दुर्जन दुखनिधि परिहरि, सत-संगत रति कीजै॥ 4॥

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