Bhajana Gīti
Kirtan

श्रीबलदेव-प्रणाम

Gauḍīya Vaiṣṇava Tradition1 min read
KrishnaNityanandaBhakti
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नमस्ते तु हलग्राम! नमस्ते मुषलायुध!।नमस्ते रेवतीकान्त! नमस्ते भक्तवत्सल!॥
नमस्ते बलिनां श्रेष्ठ! नमस्ते धरणीधर!।प्रलम्बारे! नमस्ते तु त्राहि मां कृष्ण-पूर्वज!॥ 17॥

कन्धे पर हल धारण करने वाले बलराम जी को मैं नमस्कार करता हूँ, अपने मूसल को हथियार की तरह प्रयोग करने वाले बलराम जी को नमस्कार है। हे रेवती के पति! हे भक्त वत्सल प्रभु! आपको नमस्कार है। हे ताकतवरों में सबसे ज्यादा बलशाली तथा पृथ्वी को धारण करने वाले आपको नमस्कार है। प्रलम्ब नामक असुर को मारने वाले, आपको नमस्कार है। हे श्रीकृष्ण के बड़े भाई! आप मेरी रक्षा कीजिए।(17)

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