मदन गोपाल शरण तेरी आयो।चरण कमल की सेवा दीजो,चेरो करि राखो घर जायो॥
धन्य धन्य मात पिता सुत बन्धु,धन्य जननी जिन गोद खिलायो।धन्य धन्य चरण चलत तीर्थ को,धन्य गुरु जिन हरिनाम सुनायो।जे नर विमुख भये गोविन्द सों,जन्म अनेक महादुःख पायो॥
‘श्रीभट्ट’ के प्रभु दियो अभय-पद,यम डरप्यो जब दास कहायो॥