Bhajana Gīti
Kirtan

हरि हे दयाल

Bhaktivinoda Ṭhākura1 min read
RadhaBhakti
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हरि हे दयाल मोर जय राधानाथ।बारबार एइबार लह निज साथ॥ 1॥
बहु योनि भ्रमि’ नाथ, लइनु शरण।निजगुणे कृपा कर अधमतारण॥ 2॥
जगतकारण तुमि जगतजीवन।तोमा छाड़ा कार नहि हे राधारमण॥ 3॥
भुवनमंगल तुमि भुवनेर पति।तुमि उपेक्षिले नाथ, कि हइबे गति॥ 4॥
भाबिया देखिनु एइ जगत-माझारे।तोमा बिना केह नाहि ए दासे उद्धारे॥ 5॥
हे दयालु राधा-नाथ, श्रीहरि! आपकी जय हो, मैं बार-बार आपसे

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