आज अवधपुरी आनन्द छायो।घर घर मंगलचार बधाई, कौशल्या रानी सुत जायो॥
शुभ नक्षत्र पुनर्वसु नौमी, चैत्रमास सब भांति सुहायो।भौमवार वर मध्य दिवस के, श्रीरघुवीर जनम तब पायो।।निगमागम जाकी महिमा को, गावत गावत पार न पायो।सो महाराज काज भक्तन के, नृप दशरथ को कुंवर कहायो॥
जाके दरशन को सुर तरसें, ताहि धाय लै कण्ठ लगायो।नारायण अपनी भक्ति को, जग में प्रगट प्रभाव दिखायो॥